Vaivasvata-Manu Sarga and the Re-Manifestation of the Saptarṣis (वैवस्वतसर्गः—सप्तर्षिप्रादुर्भावः)
शीर्षाणि न्यपतंस्तानि खर्जूरा ह्यभवंस्ततः / एवं वरत्रिणः पुत्रा इन्द्रेण निहताः पुरा
śīrṣāṇi nyapataṃstāni kharjūrā hyabhavaṃstataḥ / evaṃ varatriṇaḥ putrā indreṇa nihatāḥ purā
उनके सिर गिर पड़े; तब वे खजूर के वृक्ष बन गए। इस प्रकार वरत्रि के पुत्रों को इन्द्र ने प्राचीन काल में मार डाला।