Vaivasvata-Manu Sarga and the Re-Manifestation of the Saptarṣis (वैवस्वतसर्गः—सप्तर्षिप्रादुर्भावः)
सूत उवाच पूर्वं सप्तर्षयः प्रोक्ता ये वै स्वायंभुवेंऽतरे / मनोरन्तरमासाद्य पुनर्वैवस्वतं किल
sūta uvāca pūrvaṃ saptarṣayaḥ proktā ye vai svāyaṃbhuveṃ'tare / manorantaramāsādya punarvaivasvataṃ kila
सूत ने कहा—जो सप्तर्षि पहले स्वायम्भुव मन्वन्तर में कहे गए थे, वे मन्वन्तर के परिवर्तन के बाद फिर वैवस्वत मन्वन्तर में भी प्रकट हुए।