Vaivasvata-Manu Sarga and the Re-Manifestation of the Saptarṣis (वैवस्वतसर्गः—सप्तर्षिप्रादुर्भावः)
पुनः प्रवर्त्तितः सर्गो यथापूर्वं यथाक्रमम् / तेषां प्रसूतिं वक्ष्यामि विशुद्धज्ञानकर्मणाम्
punaḥ pravarttitaḥ sargo yathāpūrvaṃ yathākramam / teṣāṃ prasūtiṃ vakṣyāmi viśuddhajñānakarmaṇām
फिर सृष्टि पूर्ववत् और क्रम के अनुसार प्रवर्तित हुई; अब मैं उन विशुद्ध ज्ञान और कर्म वाले महात्माओं की उत्पत्ति का वर्णन करूँगा।