पञ्चविंशात् परं तत्त्वं पठ्यते च नराधिप सांख्यानां तु परं तत्त्वं यथावद् अनुवर्णितम् //
सैंतालीसवाँ श्लोक। यहाँ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्ग का संकेत किया गया है।