प्रबोधनपरं ज्ञानं सांख्यानाम् अवनीपते विस्पष्टं प्रोच्यते तत्र शिष्याणां हितकाम्यया //
पैंतालीसवाँ श्लोक। यहाँ कहा गया पवित्र वचन श्रद्धा से पढ़ने योग्य है।