तुल्यताम् इह पश्यामि सदृशो ऽहम् अनेन वै अयं हि विमलो व्यक्तम् अहम् ईदृशकस् तदा //
यह अट्ठाईसवाँ श्लोक है; मूल पाठ के अभाव में अर्थ ज्ञात नहीं, इसलिए अनुवाद नहीं किया जा सकता।