यदाक्षरं प्रकृतिर् यं गच्छते गुणसंज्ञिता निर्गुणत्वं च वै देहे गुणेषु परिवर्तनात् //
सत्रहवाँ श्लोक—मूल वाक्य प्रस्तुत नहीं; इसलिए शास्त्रीय अनुवाद असंभव है। कृपया श्लोक-पाठ दें।