गुणानां महदादीनाम् उत्पद्यति परस्परम् अधिष्ठानं क्षेत्रम् आहुर् एतद् वै पञ्चविंशकम् //
चौदहवाँ श्लोक शांति देता है और ज्ञान-मार्ग का निर्देश करता है।