कर्म त्व् एके प्रशंसन्ति स्वल्पबुद्धिरता नराः तेन ते देहजालेन रमयन्त उपासते //
नवम श्लोक—इस प्रकार पुराण-मार्ग से लोग परम श्रेय प्राप्त करते हैं।