यां दिशं विद्यया यान्ति यां गच्छन्ति च कर्मणा शृणुध्वं सांप्रतं विप्रा गहनं ह्य् एतद् उत्तरम् //
यह परम रहस्य, अत्यन्त गुह्य और वेदतुल्य माना गया है; निंदकों से न कहना, पर भक्तों को प्रकट करना।