मुनय ऊचुः यद्य् एवं वेदवचनं कुरु कर्म त्यजेति च कां दिशं विद्यया यान्ति कां च गच्छन्ति कर्मणा //
अब इस ब्रह्मपुराण में पुण्यवर्धक विषय कहा जाता है, जिसे सुनकर मनुष्य शुद्ध होकर धर्ममार्ग में स्थिर होता है।