शीतोष्णवातवर्षाम्बुवैद्युतादिसमुद्भवः तापो द्विजवरश्रेष्ठाः कथ्यते चाधिदैविकः //
अष्टम श्लोक—श्रवण-कीर्तन का पुण्य तथा भक्ति की वृद्धि कही जाती है।