भगवच्छब्दवाच्यानि विना हेयैर् गुणादिभिः सर्वाणि तत्र भूतानि निवसन्ति परात्मनि //
यहाँ श्लोक का पाठ केवल “अड़सठ” संख्या के रूप में दिया है; विस्तृत अर्थ मूल ग्रंथ में देखना चाहिए।