कामक्रोधभयद्वेषलोभमोहविषादजः शोकासूयावमानेर्ष्यामात्सर्याभिभवस् तथा //
पंचम श्लोक—धर्म की महिमा तथा विधि-निषेध का प्रकाश किया जाता है।