मुनय ऊचुः मोक्षः पितामहेनोक्त उपायान् नानुपायतः तम् उपायं यथान्यायं श्रोतुम् इच्छामहे मुने //
यहाँ चालीसवाँ श्लोक-संकेत दिया गया है; मूल श्लोक-पाठ उपलब्ध नहीं है।