अदुःखम् असुखं ब्रह्म भूतभव्यभवात्मकम् नैतज् ज्ञात्वा पुमान् स्त्री वा पुनर्भवम् अवाप्नुयात् //
यहाँ सैंतीसवाँ श्लोक-संकेत दिया गया है; मूल श्लोक-पाठ उपलब्ध नहीं है।