धर्मं धर्मभृतां श्रेष्ठा मुनयः सत्यदर्शिनः आत्मानो व्यापिनो विप्रा इति पुत्रानुशासनम् //
अध्याय 238 का चौंतीसवाँ श्लोक—यहाँ श्लोक-संख्या 34 निर्दिष्ट है।