उत्तमां बुद्धिम् आस्थाय ब्रह्मभूयाय कल्पते उत्तीर्णः सर्वसंक्लेशान् प्रसन्नात्मा विकल्मषः //
अध्याय 238 का इकतीसवाँ श्लोक—यहाँ श्लोक-संख्या 31 निर्दिष्ट है।