इन्द्रियाणि प्रमाथीनि बुद्ध्या संयम्य तत्त्वतः सर्वतः प्रसृतानीह पिता बालान् इवात्मजान् //
सत्रहवाँ श्लोक—मूल पाठ के अभाव में तात्पर्य सहित अनुवाद प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।