अन्तर्वसति भोगेन परिरभ्य वसुंधराम् य एष विष्णुः सो ऽनन्तो भगवान् वसुधाधरः //
दो सौ छब्बीसवें अध्याय का यह पैंसठवाँ श्लोक है।