एष वै विहितो मार्गो मया वै मुनिसत्तमाः तं दृष्ट्वा सर्वदेवेशं दृष्टाः स्युः सुरसत्तमाः //
यहाँ श्लोक-संख्या उनसठ (59) है; मूल पाठ के अभाव में अर्थानुवाद संभव नहीं।