सर्वपार्थिवरत्नाढ्यो भविष्यति स वीर्यवान् पृथिव्याम् अप्रतिहतो वीर्येणापि भविष्यति //
यहाँ श्लोक का मूल पाठ उपलब्ध नहीं है; केवल “43” संख्या दी गई है। कृपया संस्कृत श्लोक भेजें, तब मैं शास्त्रीय अनुवाद दूँगा।