यज्विनां च विशुद्धानां वंशे ब्राह्मणसत्तमाः स शूरः क्षत्रियश्रेष्ठो महावीर्यो महायशाः //
दो सौ छब्बीसवें अध्याय का उनतालीसवाँ श्लोक यहाँ निर्दिष्ट है।