यदैतान्य् अवतिष्ठन्ते मनःषष्ठानि चात्मनि प्रसीदन्ति च संस्थायां तदा ब्रह्म प्रकाशते //
यहाँ मूल संस्कृत श्लोक उपलब्ध नहीं है; केवल ‘53’ संख्या दी गई है। कृपया श्लोक का पाठ भेजें, तब मैं शास्त्रीय अनुवाद दूँगा।