वर्जयेद् उद्धतां वाचं हिंसायुक्तां मनोनुगाम् ब्रह्मतेजोमयं शुक्रं यस्य सर्वम् इदं जगत् //
यहाँ श्लोक का मूल पाठ उपलब्ध नहीं है; केवल ‘44’ संख्या दी गई है। कृपया संस्कृत श्लोक भेजें, तब शास्त्रीय अनुवाद किया जाएगा।