सर्वतःपाणिपादं तत् सर्वतोक्षिशिरोमुखम् सर्वतःश्रुतिमल् लोके सर्वम् आवृत्य तिष्ठति //
यहाँ श्लोक-संख्या 30 का निर्देश है; मूल संस्कृत पाठ उपलब्ध नहीं है।