एवं मया मुनिश्रेष्ठाः सारात् सारतरं परम् कथितं परमं मोक्षं यं ज्ञात्वा न निवर्तते //
यहाँ श्लोक संख्या 52 है; मूल संस्कृत पाठ उपलब्ध नहीं है, इसलिए केवल संकेतात्मक अनुवाद दिया जा रहा है।