येन क्षराक्षरे भिन्ने न भयं तस्य विद्यते विद्यते तु भयं यस्य यो नैनं वेत्ति तत्त्वतः //
यहाँ केवल श्लोक-संख्या (47) दी गई है; मूल संस्कृत-पाठ उपलब्ध न होने से अर्थानुवाद संभव नहीं।