अवाप्तम् एतद् धि पुरा सनातनाद् धिरण्यगर्भाद् धि ततो नराधिप प्रसाद्य यत्नेन तम् उग्रतेजसं सनातनं ब्रह्म यथा त्वयैतत्
अध्याय 245 का श्लोक 40—मूल वाक्य के बिना धर्मपरक अनुवाद सिद्ध नहीं हो सकता।