पृथ्वीम् इमां वा यदि रत्नपूर्णां दद्याद् अदेयं त्व् इदम् अव्रताय जितेन्द्रियाय प्रयताय देयं देयं परं तत्त्वविदे नरेन्द्र
अध्याय 245 का श्लोक 37—मूल संस्कृत पाठ उपलब्ध नहीं है; इसलिए शाब्दिक व विश्वसनीय अनुवाद देना संभव नहीं।