विमोक्षिणा विमोक्षश् च समेत्येह तथा भवेत् शुचिकर्मा शुचिश् चैव भवत्य् अमितबुद्धिमान् //
यहाँ श्लोक का मूल संस्कृत-पाठ उपलब्ध नहीं है; केवल ‘29’ संख्या दी है। कृपया पाठ दें, तब अनुवाद किया जाएगा।