बुध्यमानेन बुद्धेन समतां याति मैथिल सङ्गधर्मा भवत्य् एष निःसङ्गात्मा नराधिप //
यह अध्याय 245 का बीसवाँ श्लोक है; मूल श्लोक-पाठ यहाँ अंक-रूप में संकेतित है।