निष्कुटे स्थापयाम् आस पारिजातं महातरुम् यम् अभ्येत्य जनः सर्वो जातिं स्मरति पौर्विकीम् //
एकादश श्लोक—यहाँ श्लोक-पाठ नहीं दिया गया; इसलिए श्रद्धापूर्वक भी अनुवाद नहीं हो सकता। कृपया पाठ दें।