हर्षम् उत्पादयाम् आस द्वारकावासिनां द्विजाः अवतीर्याथ गरुडात् सत्यभामासहायवान् //
दशम श्लोक—मूल पाठ के अभाव में यथार्थ अनुवाद संभव नहीं। कृपया ब्रह्मपुराण का श्लोक लिखें।