व्यास उवाच संस्तुतो भगवान् इत्थं देवराजेन केशवः प्रहस्य भावगम्भीरम् उवाचेदं द्विजोत्तमाः //
यहाँ अध्याय 204 के प्रथम श्लोक का मूल पाठ नहीं दिया गया; इसलिए अनुवाद स्थगित है।