पैलूष उवाच क्रोधस् तु प्रथमं शत्रुर् निष्फलो देहनाशनः ज्ञानखड्गेन तं छित्त्वा परमं सुखम् आप्नुयात् //
तेरहवें श्लोक में क्रम-संकेत है; शास्त्र-पाठ से मन शुद्ध होता है।