तथैव पौरुषं लिङ्गम् अनुमानाद् धि मन्यते स लिङ्गान्तरम् आसाद्य प्राकृतं लिङ्गम् अव्रणम् //
यह ब्रह्मपुराण का षट्चत्वारिंशत्तम श्लोक है; इसके मूल शब्द यहाँ प्रदर्शित नहीं हैं।