सर्गकोटिसहस्राणि मरणान्तासु मूर्तिषु य एवं कुरुते कर्म शुभाशुभफलात्मकम् //
यहाँ ‘४२’ श्लोक-संख्या मात्र है; मूल पाठ के बिना उसका अर्थानुवाद उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।