मनुष्यत्वाद् दिवं याति देवो मानुष्यम् एति च मानुष्यान् निरयस्थानम् आलयं प्रतिपद्यते //
यहाँ श्लोक का तृतीय भाग पवित्र अर्थ का संकेत देता है और धर्म की महिमा प्रकट करता है।