प्रकृत्यात्मानम् एवात्मा एवं प्रविभजत्य् उत स्वाहाकारवषट्कारौ स्वधाकारनमस्क्रिये //
यहाँ श्लोक 26 निर्दिष्ट है; इसके पाठ में श्रद्धा और शुद्धता अपेक्षित है, जिससे पुराणोक्त फल प्राप्त हो।