पुलिनानि विविक्तानि विविधानि वनानि च काननेषु विविक्ताश् च शैलानां महतीर् गुहाः //
बाईसवाँ श्लोक—यहाँ मूलपाठ निर्दिष्ट है; इसका भाव मोक्षमार्ग को प्रकाशित करने वाला और शान्ति देने वाला है।