मासोपवासी मूलाशी फलाहारस् तथैव च वायुभक्षश् च पिण्याकदधिगोमयभोजनः //
सत्रहवाँ श्लोक—मूल श्लोक के बिना पुराणार्थ का निश्चय नहीं हो सकता; कृपया पाठ प्रस्तुत करें।