जनपदमध्ये समुदयस्थानं स्थानीयं निवेशयेत् वास्तुकप्रशस्ते देशे नदीसङ्गमे ह्रदस्याविशोषस्याङ्के सरसस्तटाकस्य वा वृत्तं दीर्घं चतुरश्रं वा वास्तुवशेन वा प्रदक्षिणोदकं पण्यपुटभेदनमंसपथवारिपथाभ्यामुपेतम् ॥ कZ_०२.३.०३ ॥
janapadamadhye samudayasthānaṃ sthānīyaṃ niveśayet vāstukapraśaste deśe nadīsaṅgame hradasyāviśoṣasyāṅke sarasas taṭākasya vā vṛttaṃ dīrghaṃ caturaśraṃ vā vāstuvaśena vā pradakṣiṇodakaṃ paṇyapuṭabhedanam aṃsapatha-vāripathābhyām upetam
जनपद के मध्य में वह ‘स्थानीय’ को आय-संग्रह और आर्थिक समागम के केंद्र के रूप में बसाए—वास्तुकारों द्वारा प्रशस्त स्थान पर: नदियों के संगम पर, न सूखने वाले ह्रद के तट पर, या सरोवर/तालाब के पास; स्थल के अनुसार उसे वृत्त, दीर्घ या चतुरश्र रूप में बसाए; परिक्रमा हेतु जल-व्यवस्था हो; माल की गठरियों को खोलकर जाँचने की सुविधा हो; और वह स्थल-मार्ग तथा जल-मार्ग—दोनों से युक्त हो।
It lowers transaction and enforcement costs: taxes, customs, storage, inspection, and security can be centralized where goods and people naturally converge.