तारमुपशुद्धं वा अस्थितुत्थे चतुः समसीसे चतुः शुष्कतुत्थे चतुः कपाले त्रिर्गोमये द्विरेवं सप्तदशतुत्थातिक्रान्तं सैन्धविकयोज्ज्वालितम् ॥ कZ_०२.१३.४९ ॥
tāram upaśuddhaṃ vā asthitutthe catuḥ samasīse catuḥ śuṣkatutthe catuḥ kapāle trir gomaye dvir evaṃ saptadaśatutthātikrāntaṃ saindhavikayojjvālitam
तार (रजत), या आंशिक रूप से शुद्ध रजत, का संस्कार इस प्रकार करें: अस्थि-तुत्थ के साथ चार (बार/भाग), सम-सीसा के साथ चार, शुष्क तुत्थ के साथ चार; फिर कपाले (क्रूसिबल/पात्र) में तीन बार, गोमय (ईंधन) में दो बार—इस प्रकार सत्रह तुत्थ-उपचारों को पार करके सैन्धविक योग के साथ अग्नि में तपाएँ।
Counted steps make the process inspectable and enforceable—officials can verify compliance and assign liability for deviations.