तपनीयं ज्येष्ठं सुवर्णं सुरागं समसीसातिक्रान्तं पाकपत्त्रपक्वं सैन्धविकयोज्ज्वालितं नीलपीतश्वेतहरितशुकपत्त्रवर्णानां प्रकृतिर्भवति ॥ कZ_०२.१३.४७ ॥
tapanīyaṃ jyeṣṭhaṃ suvarṇaṃ surāgaṃ samasīsātikrāntaṃ pākapattrapakvaṃ saindhavikayojjvālitaṃ nīlapītaśvetaharitaśukapattravarṇānāṃ prakṛtir bhavati
‘तपनीय’ श्रेष्ठ सुवर्ण—अच्छे रंग वाला, सम-सीसा (बराबर सीसा) वाली अवस्था से आगे संसाधित, पतली परतों में पकाकर परिपक्व (पाकपत्त्रपक्व), और सैन्धविक योग से अग्नि में तपाया हुआ—नीला, पीला, श्वेत, हरित तथा तोते के पंख-जैसे रंगों की प्राकृतिक आधार-धातु बनता है।
It gives inspectors practical criteria to verify whether gold meets state-defined grades, which protects revenue and prevents counterfeit or under-standard bullion.