द्वैपायनह्रदे दुर्योधनान्वेषणम् / The Search for Duryodhana at Dvaipāyana Lake
कुरर्य इव शब्देन नादयन्त्यो महीतलम् | उस समय वहाँ अपने पतियोंको पुकारती और रोती-बिलखती हुई राजमहिलाओंका महान् आर्तनाद सब ओर गूँज उठा। राजन! अपनी सेना और पतियोंके संहारका समाचार सुनकर वे राजकुलकी युवतियाँ अपने आर्तनादसे भूतलको प्रतिध्वनित करती हुई बारंबार कुररीकी भाँति विलाप करने लगीं || ६६-६७ $ || आजलसघ्नु: करजैश्वापि पाणिभिश्न शिरांस्युत
kuraryā iva śabdena nādayantyo mahītalam |
કુરરી પક્ષીની જેમ આર્ત સ્વરોથી તે રાજસ્ત્રીઓએ ધરાતળને ગુંજાવી દીધું. પતિઓના વધ અને સેનાસંહારનો સમાચાર સાંભળીને રાજકુલની યુવતીઓ વારંવાર વિલાપ કરવા લાગી।
संजय उवाच