Vidura’s Message to Dhṛtarāṣṭra: Authorization for Dāna and Public Welfare (विदुरवाक्यम्—दानानुज्ञा)
संचरिष्यति लोकांश्व देवगन्धर्वरक्षसाम् । स्वच्छन्देनेति धर्मात्मा यन्मां त्वमनुपृच्छसि,उसके समाप्त होनेपर ये राजा धृतराष्ट्र गान्धारीके साथ कुबेरके लोकमें जायँगे और वहाँ राजाधिराज कुबेरसे सम्मानित हो इच्छानुसार चलनेवाले विमानपर बैठकर दिव्य वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो देव, गन्धर्व तथा राक्षसोंके लोकोंमें स्वेच्छानुसार विचरते रहेंगे। ऋष्िपुत्र महाभाग धर्मात्मा धृतराष्ट्रके सारे पाप इनकी तपस्याके प्रभावसे भस्म हो जायाँगे। राजन! तुम मुझसे जो बात पूछ रहे थे, उसका उत्तर यही है
sañcariṣyati lokāṃś ca devagandharvarakṣasām | svacchandena iti dharmātmā yan māṃ tvam anupṛcchasi ||
ધર્માત્મા ધૃતરાષ્ટ્ર સ્વેચ્છાનુસાર દેવ, ગંધર્વ અને રાક્ષસોના લોકોમાં વિહરશે—હે ધર્મનિષ્ઠ, તું મને જે પૂછ્યું હતું તેનો ઉત્તર આ જ છે.
नारद उवाच