Previous Verse
Next Verse

Shloka 15

Udyoga Parva, Adhyāya 73 — Kr̥ṣṇa’s Appraisal of Bhīma’s Altered Temper and Reaffirmation of Martial Resolve

हयग्रीवो विदेहानां वरयुश्न महौजसाम्‌ । बाहु: सुन्दरवंशानां दीप्ताक्षाणां पुरूरवा:,जैसे धर्मके विप्लवका समय उपस्थित होनेपर तेजसे प्रज्वलित होनेवाले समृद्धिशाली असुरोंमें भयंकर कलह उत्पन्न हुआ था, उसी प्रकार हैहयवंशमें मुदावर्त, नीपकुलमें जनमेजय, तालजंघोंके वंशमें बहुल, कृमिकुलमें उद्ण्ड वसु, सुवीरोंके वंशमें अजबिंदु, सुराष्ट्रकुलमें रुषद्धिक, बलीहवंशमें अर्कज, चीनोंके कुलमें धौतमूलक, विदेहवंशमें हयग्रीव, महौजा नामक क्षत्रियोंके कुलमें वरयु, सुन्दरवंशी क्षत्रियोंमें बाहु, दीप्ताक्षकुलमें पुरूरवा, चेदि और मत्स्यदेशमें सहज, प्रवीरवंशमें वृषध्वज, चन्द्रवत्सकुलमें धारण, मुकुटवंशमें विगाहन तथा नन्दिवेगकुलमें शम--ये सभी कुलांगार एवं नराधम क्षत्रिय युगान्तकाल आनेपर ऊपर बताये अनुसार भिन्न-भिन्न कुलोंमें प्रकट हुए थे

«Chez les Videha, Hayagrīva ; chez les Mahaujas, Varayu ; chez les Sundara, Bāhu ; chez les Dīptākṣa, Purūravas—»

भीम उवाच