द्वैपायनह्रदे दुर्योधनान्वेषणम् / The Search for Duryodhana at Dvaipāyana Lake
आचक्षीथा: सर्वमिदं मां च मुक्त महाहवात् । अस्मिंस्तोयहदे गुप्तं जीवन्तं भृशविक्षतम्,“संजय! तुम प्रज्ञाचक्षु ऐश्वर्यशशाली महाराजसे कहना कि “आपका पुत्र दुर्योधन वैसे पराक्रमी सुहृदों, पुत्रों और भ्राताओंसे हीन होकर सरोवरमें प्रवेश कर गया है। जब पाण्डवोंने मेरा राज्य हर लिया, तब इस दयनीय दशामें मेरे-जैसा कौन पुरुष जीवन धारण कर सकता है?” संजय! तुम ये सारी बातें कहना और यह भी बताना कि “दुर्योधन उस महासंग्रामसे जीवित बचकर पानीसे भरे हुए इस सरोवरमें छिपा है और उसका सारा शरीर अत्यन्त घायल हो गया है'
sañjaya uvāca |
ācakṣīthāḥ sarvam idaṃ māṃ ca mukta-mahāhavāt |
asmiṃs toyahrade guptaṃ jīvantaṃ bhṛśa-vikṣatam ||
Sañjaya dit : «Dis-lui tout cela, et dis-lui aussi ce qui me concerne, moi qui ai échappé à cette grande bataille : Duryodhana est vivant, mais grièvement blessé, et demeure caché dans ce lac plein d’eau.»
संजय उवाच