द्रोणकर्णयोः निशि संप्रहारः — Night Engagement with Droṇa and Karṇa
तथा नाभ्येति सूर्योडस्तं यथा सत्यं भवेद् वच: । चोदयाश्वांस्तथा कृष्ण यथा हन्यां जयद्रथम्,“श्रीकृष्ण! जबतक सूर्य अस्ताचलको न चले जाय, तभीतक जैसे भी मेरी प्रतिज्ञा सच्ची हो जाय और जैसे भी मैं जयद्रथको मार सकूँ, उसी प्रकार शीघ्रतापूर्वक इन घोड़ोंको हॉकिये'
«Ô Kṛṣṇa, presse ainsi les chevaux, afin qu’avant que le Soleil ne se couche, ma parole soit rendue vraie et que je puisse abattre Jayadratha.»
संजय उवाच